© Samridhhi Mandawat (2019)

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मुसाफिर



हम वह अय्यार हैं,

जिसका कोई मुसलसल नहीं


हम वह रूह हैं,

जो कभी मय्यस्सर नहीं


हम वह आशिक़ भी बन जाते हैं,

जिसके लिए मोहब्बत की कोई कश्ती नहीं


पर ज़माना भूल जाता हैं,

हम वह सुकून हैं -

जिसकी किसीको आदत नहीं


वह दो पल के मुसाफिर हैं -

जिसका किसीको कुछ पता नहीं

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